जून 2017

'हमने लगातार अपने लाभ लक्ष्यों को पूरा किया है'

वेम्बू मुथुकुमारन में सरलता का एक आग्रह है और यह इससे स्पष्टतया प्रकट हो जाता है जो वे कहते और करते हैं। यह स्पष्ट किया जा सकता है कि क्यों बछी शूज- टाटा इंटरनेशनल (टीआईएल) की एक सहायक कंपनी तथा कंपनी के चर्म तथा चर्म उत्पाद व्यवसाय का भाग- के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यह मानते हैं कि सबसे बड़े विक्रेताओं के लिए सबसे सरल जूते बनते हैं।

श्री मुथुकुमारन उन जूतों के बारे में काफी कुछ जानते हैं जो बाजार की मांग में खरीदारों का ध्यान आकृष्ट कर सकते हैं। बछी शूज, जिसे टीआईएल ने 2010 में हस्तगत किया, एक निर्यातोन्मुखी विनिर्माता हैं जो यूरोपीय ब्रांडों के लिए तैयार किए जानेवाले बड़ी मात्रा में फुटवीयर का निर्यात करते हैं।

श्री मुथुकुमारन ने 2002 में प्रबंधक के पद पर बछी शूज में योगदान किया और श्रेणीक्रम से उन्नति प्राप्त करते हुए 2015 में मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने। वे यहां फिलिप चाको से इस बारे में बताते हैं कि वे अपने ग्राहकों को संतुष्ट रखने के लिए क्या करते हैं। कुछ अंश:

2010 में टीआईएल द्वारा हस्तगत किए जाने के बाद बछी शूज ने किस प्रकार की उन्नति दर्ज की है?
पहले 2010 में देखें तो, बछी शूज एक दिन में 6,000 जोड़ी जूते तैयार करता था। यह संख्या प्रतिदिन 10,000 तक पहुंच गई है। हमारी मौजूदा क्षमता प्रतिवर्ष लगभग 2.5 मिलियन जूते तैयार करने की है और हम हर वर्ष लगभग 800 नए स्टाइल बनाते हैं।

हमारे टर्नओवर में भी उछाल आया है, जो वर्ष में रु. 1 बिलियन से बढ़कर रु. 3.2 बिलियन हो गया है। हमने अपनी क्षमताओं के बेहतर इस्तेमाल तथा उत्पादकता में वृद्धि के माध्यम से पिछले पांच-छः वर्षों से अपने लाभ लक्ष्यों को लगातार पूरा किया है। हमने लागत पर नियंत्रण बनाए रखा है और इससे लाभ में वृद्धि हुई है।

लागत को काबू में रखने के लिए क्या रणनीति है?
हम जूते के कीमती हिस्सों पर ध्यान देते हैं। जूते की कीमत की 70 प्रतिशत तक उसकी सामग्री की लागत का होता है। हम इस लागत को कम करने का प्रयत्न करते हैं। दूसरा बड़ा लागत घटक श्रमिक है, जिसका जूते की कीमत में 20 प्रतिशत तक हिस्सा होता है। यहां भी, हमारा प्रयास होता है कि बजट के अंदर बने रहें, और यदि संभव हो तो, कीमत इससे कम ही रखें।

कृपया मुझे उन बाजारों के बारे में थोड़ा बताइए जहां बछी शूज आपूर्ति करता है जहां के लिए यह निर्यातोन्मुखी है।
हम जितना बनाते हैं उसमें लगभग 95% तो यूके और यूरोप महाद्वीप को निर्यात कर दिया जाता है, और 2 से 3 प्रतिशत अमेरिकी बाजार में बेचा जाता है। हम बच्चों के जूते बनाने में विशेषज्ञ हैं और हम कई सारे तरह के जाड़ों के जूते बनाते हैं, और साथ ही अन्य मौसमों के लिए भी उत्पाद तैयार करते हैं, जैसे कि वसंत और गर्मी के लिए सैंडल आदि।

बछी शूज बच्चों के लिए जूते बनाते हैं और सालाना लगभग 800 स्टाइलों का निर्माण करते हैं

हम किसी भी आनेवाले मौसम के लिए अपने उत्पादों की मात्रा को संतुलित रखने का प्रयास करते हैं। हमारे ब्रिटिश ग्राहक, क्लार्क्स हैं, जो शरद-जाड़े के लिए हमारे 40 प्रतिशत उत्पाद, तथा वसंत-गर्मी के लिए हमारे उत्पादों का 30 प्रतिशत तक खरीदते हैं। हम एलेफैंटन नामक एक जर्मन ब्रांड को आपूर्ति करते हैं, जो वसंत-गर्मी के लिए हमारे उत्पादों के 40 प्रतिशत से ज्यादा और शरद-जाड़े के लिए हमारे 20-22 प्रतिशत तक उत्पाद खरीदते हैं। यूरोप के बाजार में हमारे और चार ग्राहक हैं और वे हमारी क्षमता का शेष भाग खरीद लेते हैं।

अमेरिका को निर्यात की जानेवाली हमारी मात्रा अभी कम है लेकिन हम इसमें मोटे तौर पर बढ़त की उम्मीद करते हैं। हम अभी हर वर्ष लगभग 200,000 जोड़ी जूते अमेरिका को भेज रहे हैं; हम इस संख्या को अगले पांच वर्षों में 500,000 से ज्यादा तक ले जाना चाहते हैं। यहां संभावना है।

क्या भारत के लिए आपके पास कोई योजना है?
2008 की मंदी के बाद यूरोप और यूके की बाजार स्थितियां चुनौतीपूर्ण रही हैं। इसका मतलब यह है कि हमें विकास के लिए और जगहें भी तलाशनी होंगी। इस परिस्थिति में, आप भारत को उपेक्षित नहीं कर सकते।

हमें यकीन है कि हम भारतीय बाजार में काफी जूते बेच सकते हैं, और हमने अपने इन-हाउस ब्रांड, फीटसाइंस के जरिए इसकी शुरुआत भी कर दी है। हम इस ब्रांड का प्रचार-प्रसार एक संस्थागत व्यवसाय की तरह कर रहे हैं, जिसमें 20 प्रतिशत तक बिक्री सीधे स्कूलों को करने का लक्ष्य रखा गया है। इस ब्रांड के लिए हमारी वेबसाइट है- www.feetscience.in - तथा एक अलग मार्केटिंग टीम भी है।

फीटसाइंस एक बेहतरीन उत्पाद है, जिसमें यूरोप के बाजारों को निर्यात होनेवाले हमारे जूतों के समान ही आराम और शिल्प मौजूद है। इसका नाम भी इस ब्रांड के लिए हमारी सोच को दर्शाता है। बहुत से लोग, खास तौर पर स्कूल जानेवाले बच्चे, एक बार में छः से सात घंटों तक जूता पहने रहते हैं। हम यह सुनिश्चित करने के लिए विज्ञान पर काम करते हैं कि इस अवधि में उनके पैर आरामदेह स्थिति में रहें।

हम यहां अपेक्षाकृत सस्ते ब्रांडों से प्रतियोगिता नहीं कर रहे और लाखों की संख्या में इन जूतों को बनाने की भी हमारी कोई योजना नहीं है। हमने हल्की सामग्रियों का इस्तेमाल किया है, जिससे जूते लचीले बन जाते हैं तथा श्रेष्ठतम गुणवत्ता सुनिश्चित होती है। फीटसाइंस के माध्यम से, हम भारतीय बाजार में 1 मिलियन जोड़ी जूतों के अपने लक्ष्य तक पहुंचने की आशा करते हैं। हम फिलहाल देश में अपने उत्पादन के केवल 2 प्रतिशत तक जूते बेच रहे हैं, लेकिन इसमें बदलाव होगा। हम अगले पांच वर्षों में 15-20 प्रतिशत तक का लक्ष्य छू लेंगे।

भारतीय बाजार के लिए आपकी बिक्री की क्या रणनीति होगी?
हमें विनिर्माण में विशेषज्ञता और अनुभव प्राप्त है, हमारे पास खुदरा विक्रय के लिए आधारभूत संरचना तथा साधन नहीं हैं। हमारा लक्ष्य यह है कि हम प्रथम चरण में ऑनलाइन बेचें तथा उसके बाद अन्य टाटा संपर्कों से उनके आउटलेट के माध्यम से बिक्री के लिए गठबंधन की संभावना देखें, लेकिन अगले दो वर्षों तक इसकी कोई योजना नहीं है। हम अभी धीमी और स्थिर गति से संवृद्धि की योजना बना रहे हैं: पहले वर्ष में 50,000 जोड़ी जूते तथा दूसरे से तीसरे साल में 200,000 जोड़ी जूते।

आपने यूरोप में मंदी के रुझान का जिक्र किया था। जमीनी हालात कितने मुश्किल हैं?
इस मामले में पहली चुनौती तो कीमत की है। मिसाल के तौर पर लीजिए, कि यूके, जिसे हम अपने जूता उत्पादन का 35 प्रतिशत तक निर्यात करते हैं। ब्रेक्सिट वोट के बाद, वहां के पाउंड के मूल्य में लगभग 20 प्रतिशत तक की गिरावट आ गई। इसके परिणामस्वरूप हमारे ब्रिटिश ग्राहकों को अपना मार्जिन बचाने में दिक्कत होती है। उन्हें अपना बिजनस टिकाऊ बनाए रखने के लिए हमारे जैसे सप्लायर्स के साथ मोल-भाव करना पड़ता है।

हमारे ऊपर अपनी कीमत कम करने का दबाव होता है और कभी-कभी तो कीमत निर्धारण की विकट समस्या आ खड़ी होती है। हमें कीमत की हर संभावित वृद्धि को सहन करना पड़ता है। हमें उत्पादकता बढ़ानी होगी और स्थिति को संभालने के लिए और भी बहुत कुछ करना होगा। सरल शब्दों में कहें तो हमें बिना अपनी गुणवत्ता से समझौता किए कीमत को बढ़ाने से परहेज करना होगा।

बछी शूज को अन्य किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
कर्मचारियों को रोक कर रखना एक अन्य चुनौती है। हमारे पास अपने संगठन में अभी 4000 कर्मचारी हैं और हमें इस संख्या को अगले दो-तीन वर्षों में बढ़ाना होगा। लगभग 80 प्रतिशत कामगार महिलाएं हैं इसलिए हमें ज्यादातर स्थानीय स्तर पर ही नियुक्ति करनी पड़ती है। महिलाओं को नियुक्त करना हम इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि लेदर की सिलाई के मामले में हाथ के काम में वे अधिक निपुण और मृदुल होती हैं। बच्चों और शिशुओं के लिए जूते बनाने के लिए यह बात लाभकारी होती है।

अपने संयंत्रों में जहां भी स्वचालन व्यवहार्य होता है हम उसे अपनाने को लेकर गंभीर होते हैं। हमारे पास अपनी फैक्ट्रियों में ऑटोमैटिक सिलाई मशीनें हैं और वे बड़ी मददगार होती हैं, आपको अर्गोनोमिक्स जैसे मुद्दों पर चिंता करने की जरूरत नहीं। इस लिहाज से कुशल कामगार एक बहुमूल्य धरोहर होता है। हम कितनी भी तादाद में सहायक रख सकते हैं, लेकिन किसी भी कर्मचारी को प्रशिक्षित कर एक कुशल तकनीशियन बनाने में समय लगता है।

बछी शूज का यहां से अगला लक्ष्य क्या होगा?
हम जहां हैं वहां बने रहने के लिए हमें काफी प्रयास करना है और यही हम कर रहे हैं। जिन स्थितियों के बारे में मैंने बताया है उनके कारण अगले एक साल में हम किसी बड़ी तरक्की की अपेक्षा नहीं करते। हम बस अपनी आधार रेखा को बचाए रखने की कोशिश कर रहे हैं; यदि आप अपनी आधार रेखा नहीं बचा पाए तो शीर्ष रेखा ऊंचा उठाने का कोई मतलब नहीं रहता। लेकिन दो साल हम 14-20 प्रतिशत संवृद्धि पाने के उम्मीद करते हैं और तीन साल में हमें उम्मीद है कि हम 35 लाख जोड़ी जूते सालाना तैयार करने लगेंगे।

कौन सी बात किसी जूते को बेस्टसेलिंग बनाता?
मेरे अनुभव के अनुसार सबसे सरल जूता हमेशा बेस्ट सेलर होता है। जूते पर अधिक चीजें लादना, जैसे लेस, जिपर, वेल्क्रो आदि-आदि तमाम चीजें उसकी सरलता छीन लेती है।