अप्रैल 2018

‘हम एक बार में एक कदम उठाएंगे’

"चीजों को सरल रखें, लाभशील बनें और प्रासंगिकता कायम रखें।" आतिथ्य उद्योग में लगभग साढ़े तीन दशक के विशिष्ट करियर के दौरान यही वह ज्ञान है जो पुनीत चटवाल ने अर्जित किए हैं। और यही व्यवसाय दर्शन का अधार है जो नवनियुक्त मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडियन होटल्स कंपनी के चीफ एक्जीक्यूटिव का मार्गदर्शन करेगा।

यूरोप और उत्तर अमेरिका के होटल समूहों के लीडरशिप पदों पर आसीन रहे वैश्विक पेशेवर श्री चटवाल इंडियन होटल्स के साथ जुड़ने से पहले स्टीजेनबर्गर होटल्स के प्रमुख रहे हैं जो ड्यूश हॉस्पिटैलिटी समूह का अंग है। क्रिस्टाबेल नोरोन्हा के साथ इस साक्षात्कार में दिल्ली निवासी श्री चटवाल ताज समूह को प्रगति के अगले सोपान पर ले जाने की चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी के साथ अपनी प्राथमिकता बताते हैं। कुछ अंश:

इंडियन होटल्स में आपका पहला अनुभव क्या रहा?

34 साल पहले जब मैंने अपने करियर की शुरुआत की थी तब से इंडियन होटल्स इंडस्ट्री का एक प्रतिष्ठित नाम रहा है। हमारा मकसद है कंपनी के मूल सिद्धांतों का संरक्षण करना और प्रगति में स्थायित्व सुनिश्चित करना। मूल सिद्धांत वह है जिसके आधार पर आज हम यहां है और हम इंडियन होटल्स को अगली ऊंचाई पर ले जाकर प्रगति कर सकते हैं। आप जो काम बढ़िया कर सकते हैं उसे करते रहें, लेकिन आपको गड़बड़ियों को दुरुस्त करने के लिए रुकना भी पड़ता है। हम, यानी कि 30 सदस्यों की हमारी लीडरशिप टीम, एंटरप्राइज की पुनर्खोज करने के पक्ष में नहीं हैं।

स्टीजेनबर्गर होटल्स में अपने अनुभव के लिहाज से देखें तो इंडियन होटल्स के प्रमुख होने में क्या अंतर महसूस करते हैं? क्या ट्रांजिशन निर्बाध रहा?

मुझे लगता है किसी भी व्यवसाय में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफल होने के लिए आपको तीन चीजों के संयोजन की आवश्यकता होती है: अमेरिकी शैली की मार्केटिंग, प्रबंधन का यूरोपियन तरीका और एशियाई भावनात्मक कौशल। मेरे लिए, यह ट्रांजिशन नहीं बल्कि भारतीय आतिथ्य के साथ, अमेरिकी और यूरोपीय शैलियों के संयोजन का अवसर है।

बताया गया है कि आपको चीक एक्जीक्यूटिव के पद पर नियुक्त किया गया है ‘ताकि आप इंडियन होटल्स के प्रदर्शन में सुधार सकें और विस्तार के अगले चरण’ की निगरानी कर सकें। इसके लिए क्या अनिवार्यताएं होंगी?

मुझे लगता है कि किसी भी चीफ एक्जीक्यूटिव की भूमिका कंपनी को सभी स्तरों पर विकास कराना होता है। आतिथ्य के संदर्भ में, यह केवल नक्शे पर बिंदु अंकित करना नहीं होता बल्कि संगठन को व्यवसाय, दक्षता, डिजिटलाइजेशन, प्रक्रिया सुधार आदि रूपों में प्रगति कराना होता है।

दूसरा बिंदु यह है कि हम बहुत सालों से लाभदेय कंपनी नहीं रहे। हम चाहते हैं कि इंडियन होटल्स उपमहाद्वीप का सर्वाधिक प्रतिष्ठित और लाभदेय हॉस्पिटैलिटी कंपनी बने जिसकी बाजार हिस्सेदारी हमारे समकक्षों में सबसे ऊंची हो। हम सब कुछ टाटा की आचार संहिता और नैतिकमूल्यों का पालन करते हुए करना चाहते हैं।

इंडियन होटल्स ने ‘ताज-विशेषताओं’को आगे बढ़ाते हुए इसकी विशिष्टता को निखारा है, साथ ही इसकी लग्जरी, व्यावसायिकता और आराम संबंधी खूबियों के ताज ब्रांड के तहत संयोजित किया गया है। क्या यह रुझान जारी रहेंगे, और यदि हां, तो किस रूप में?

ताज-विशिष्टताएं कोई नई बात नही है। ताज-विशेषताएं हमारी आत्मा है और इसमें कई सारे तत्व हैं। यह हमारे काम करने का तरीका है; यह वह पद्धति है जिसमें हम अपने मेहमानों का स्वागत आतिथ्य के भारतीय स्वरूप में करते हैं। ताज-विशिष्टताओं में समुदाय के लिए किए जाने वाले हमारे प्रयास भी शामिल हैं, वे मूल्य भी शामिल हैं जिसके पक्ष में हम हमेशा खड़े रहते हैं और वह तरीका शामिल है जिससे हम अपने हितधारकों के साथ व्यवहार करते हैं। यह हमारी कुछ संपत्तियों में अंतर्निहित हैं और इसी कारण हम एक कंपनी के रूप में सबसे हटकर खड़े दिखते हैं। मुझे यकीन है कि ताज-विशिष्टताओं का लाभ पिछले कुछ दशकों में पूरी तरह नहीं उठाया गया। प्रतिस्पर्धा के कठिन होने के साथ’इंडस्ट्री में दूसरों और हमारे बीच के फर्क स्पष्ट करने के लिए ताज-विशिष्टताओं के बात करने के अधिक कारण बनते हैं।

अधिक ग्राहकों को आकर्षित करने और अधिक लाभ अर्जित करने के लिए जल्द ही हम ताज-विशिष्टताओं पर केंद्रित कुछ सिस्टमैटिक प्रोग्रामों की घोषणा करने वाले हैं, खासकर कर्मचारी सहभागिता के क्षेत्र में। हम एक कर्मचारी मैगजीन लाने वाले हैं जो हमारे लोगों की सफलता गाथा प्रस्तुत करेगी और उन्हें संगठन के लिए अपना सर्वोत्तम प्रदान करने को प्रेरित करेगी। सहभागी कर्मचारी अधिक बेहतर ग्राहक सेवा और कस्टमर केयर प्रदान कर पाते हैं। उच्च स्तरीय ग्राहक सहभागिता ग्राहक यात्रा के सभी चरणों में उच्च-स्तरीय ग्राहक सहभागिता का सृजन करता है।

हमने ताज-विशिष्टताओं (Tajness) को भरोसा, जागरुकता और आनंद के रूप में पुनर्परिभाषित किया है और इसके लिए हमारा एक लोगो होगा। ‘T’ का अर्थ ट्रस्ट, यानी हमारे ग्राहकों, हमसे जुड़े लोगों और सभी हितधारकों का भरोसा। ‘A’ का अर्थ अवेयरनेस, यानी हमारे आस-पास क्या हो रहा है इसकी जागरुकता और इंडियन होटल्स के जिम्मेदार सदस्य के रूप में हम क्या कर सकते हैं इसकी जागरुकता। प्रभावशाली तरीके से कुछ करने के लिए हमें अपने काम से आनंदित होना चाहिए; हमे आपना काम आनंदपूर्वक करना चाहिए, और ‘J’ का अर्थ यही है। ‘J’ के ऊपर एक हेक्सागॉन है, जो लोगो का अंग है और यह हमारे प्रमुख मूल्यों को निरूपित करता है।

लंबे समय से कर्जे इंडियन होटल्स ’ के गले में फंदे के समान है। कंपनी के ऊपर यह कितना बोझ है और इस बोझ को कम करने की क्या योजना है?

हम अपने ऋण को कम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस दिशा में, हम संपत्ति से बोझिल और संपत्ति की न्यूनता के बीच संतुलन बनाना चाहते हैं, जिसे हम काम करने का‘SMART’ तरीका कहते हैं। ‘S’ यानी स्ट्रटजिक; अर्थात हम ऐसे रणनैतिक प्रॉजेक्ट्स में निवेश करेंगे जिससे ब्रांड की तरक्की होगी। कुदरती रूप से, स्ट्रैटजिक हमें ‘M’की ओर ले जाएगा, जिससे हमारे मार्जिन बढ़ेगी। आज हमारे मार्जिन बहुत कम हैं; हमें इन्हें संपत्ति प्रबंधन यानी ऐसेट मैनेजमेंट के सिद्धांतों के इर्द-गिर्द सुधारना होगा जो कि ‘A’है। ‘R’ का अर्थ है स्ट्रॉन्ग, यानी मजबूत, टिकाऊ और स्थायी संबंध। इन चार के लिए हमारे पास अपने संबंधों, अधिग्रहणों और निर्णयों की सतत ट्रैकिंग होनी चाहिए जो ‘T’ द्वारा निरूपित है।

जिंजर इंडियन होटल्स की उतार-चढ़ाव वाली कहानी है। यहां कौन सा चिंतन रहा है?

जिंजर में हमारा व्यापक अवसर है चूंकि व्यवसाय के इस स्तर पर हमारा मार्जिन अधिक रहा है क्योंकि स्थिर लागत निम्न है और चर लागत को प्रबंधित किया जा सकता है। हम जिंजर को मध्य-पैमाने के सेग्मेंट में पुनर्स्थापित करना चाहते हैं जिसके साथ खाद्य एवं पेय हो भी सकते हैं और नहीं भी, और प्रत्येक के अंदर एक छोटी मीटिंग स्थल, एक भोजन कक्ष और एक रेस्तरां है जिन्हें सुरुचिपूर्ण तरीके से तैयार किया गया है।

ग्राहक इस बात की परवाह नहीं करते कि वैल्यू सेग्मेंट में कमरे का आकार क्या है और यदि वे भोजन कक्ष का इस्तेमाल नहीं करते तो उन्हें इसके लिए भुगतान नहीं करना पड़ता। हालांकि, एक महत्वपूर्ण अपेक्षा होती है निर्बाध ब्रॉडबैंड अनुभव की और हम इसे सभी जिंजर होटलों में प्रदान करने की दिशा में काम कर रहे हैं। रंगों के बेहतर चयन, फर्नीचर की स्टाइल, लाइटिंग आदि की मदद से तथा वाईफाई कनेक्टिविटी प्रदान कर हमें जिंजर को और भी खुशनुमा बनाना है।

आपको क्या लगता है, जिंजर के प्रयास में क्या खामी रह गई?

मेरे लिए इस पर टिप्पणी करना उचित होगा, लेकिन मुझे लगता है, विजय हासिल करने के लिए हमारे पर एक बड़ा अवसर होगा यदि हम असमावेशी होने की बजाए अधिक समावेशी हों। जिंजर को एक अलग निकाय के रूप में रखने का विचार सही था क्योंकि इसमें उच्च ओवरहेड लागत नहीं थी; इसे अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए था और फुर्तीला रहना चाहिए था। व्यवहार में, हालांकि, मुझे लगता है कि हमने जिसकी अनदेखी कि वह है लोगों की ताकत और वह संरचना जो ताज प्रस्तुत करता है। विकास और अधिग्रहण जैसे कुछ तत्वों के संयोजन के जरिए यदि हम इन दोनों को जोड़ सकें, तो एक यूनिट ऐसा होगा जो ताज, विवांता और जिंजर जैसे विभिन्न सेग्मेंट के लिए अकाउंट प्रबंधन करेगा। मुझे लगता है ये ऐसी जगहें हैं जहां हम सहक्रिया और सरलीकरण कर सकते हैं; जो हमारे चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन के नए साल के संदेश के अनुरूप है।

क्या आतिथ्य उद्योग ने ट्रैवल एग्रीगेटर्स के कारण होने वाले नुकसानों को रोकने का उपाय ढूंढ लिया है? ज्वार को मोड़ने के बारे में आपका क्या नजरिया है?

इस सवाल का जबाव मैं दो खंडों में दूंगा। पहला, आम तौर पर आतिथ्य उद्योग इस मुद्दे का कोई जवाब देने में सक्षम नहीं है। दरअसल, बिजनस देने के लिए ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियां (OTAs) भारी शुल्क लगाती हैं, लेकिन टैवल एजेंट तब भी थे जब मैंने इस इंडस्ट्री में प्रवेश किया था। बिजनस देने वाले ट्रैवल एजेंट जैसे अमेरिकन एक्सप्रेस या कार्लसन वैगनलिट ट्रैवल, न केवल लंबा कमीशन लेते थे बल्कि एक ओवरराइड कमीशन भी; वे रेवेन्यू के बड़े स्रोत थे। अंतर यह है कि आज यह डिजिटाइज्ड OTA स्वरूप में प्रदान किया जाता है।

दूसरा पक्ष पहुंच से जुड़ा हुआ है। कंपनियां जो अपना पहला होटल न्यू यॉर्क, लंदन, फ्रैंकफर्ट या ज्यूरिख में स्थापित करना चाहती हैं वे बिना अपना ढांचा खड़ा किए इन OTAs के साथ काम कर सकती हैं। वे वह चीज निर्मित कर सकते हैं जिसे तकनीकी रूप से वॉल्युम एस्टैब्लिशमेंट कहा जाएगा। इसलिए, ट्रैवल एग्रीगेटर्स के साथ काम करने का अर्थ है विकास करने का एक अधिक बेहतर रेंज और अधिक अवसर हासिल करना। निःसंदेह OTAs के कारण मार्जिन में कमी आई है, लेकिन नए बाजारों में प्रवेश ने मार्जिन का विस्तार किया है। कुल मिलाकर, OTAs को मैं एक अवसर की तरह देखता हूं।

क्या आप Airbnb जैसे मॉडलों को इस बिजनस सेक्टर में बड़ा अतिक्रमण करते हुए पाते हैं जहां इंडियन होटल्स की मौजूदगी है? परंपरागत आतिथ्य कंपनियों को इन निकायों से कितना खतरा है?

उत्तर हां और ना दोनों है। हालांकि Airbnb सीधे-सीधे खतरा नहीं है, वे वह हासिल करने में कामयाब रहे हैं जिसे मैं लैटेंट डिमांड (सुप्त मांग) का नाम देना चाहूंगा, जहां लोग छुट्टियों के दौरान वहन योग्य कीमत चुकाना चाहते हैं लेकिन पारंपरिक होटलों में रहना नहीं चाहते। मैं अपने दो बच्चों का उदाहरण देना चाहूंगा जो लंदन में रहते हैं। जब वे पहली बार उस शहर में गए तो जिस सर्वोत्तम दर पर मैं उनके रहने के लिए अपने संपर्कों के जरिए व्यवस्था कर सकता था वह उनके द्वारा Airbnb पर साझा किए जाने वाले अपार्टमेंट की तुलना में महंगी थी।

क्या हम Airbnb के साथ प्रतिस्पर्धा करना चाहते हैं? इसका उत्तर स्पष्ट रूप से ना है। काश, होटल उद्योग ने Airbnb मॉडल को अपनाया होता बजाए किसी और को उस स्थान में प्रवेश करनी की छूट देने के। यह विविधतापूर्ण बनने के लिए इंडस्ट्री के लिए एक अवसर की तरह होता, लेकिन इसे खो दिया गया।

यह सब इंडियन होटल्स के लिए जुड़ गया।
1903
स्थापित
98
होटल
61
अवस्थिति
दुनिया भर में
उपस्थित
भारत, यूएसए, यूके, अफ्रीका, मध्य पूर्व,
मलेशिया, श्रीलंका, मालदीव्स,
भूटान और नेपाल
ब्रांड
ताज होटल पैलेसेस एंड रिजॉर्ट,
विवांता बाइ ताज, द गेटवे होटल्स,
ताज सफारी, जिंजर होटल्स

इंडियन होटल्स की समग्र बेहतरी के लिए खाद्य और पेय घटक कितने महत्वपूर्ण हैं? कीमत निर्धारन, व्यंजन और परिवेश जैसे कारकों पर भी क्या पुनर्विचार किया जा रहा है?

खाद्य और पेय यानी फूड एंड बेवरिजेज (F&B) अतिथ्य उद्योग के बहुत ही महत्वपूर्ण अंग हैं, खासकर भारतीय उपमहाद्वीप में। साथ ही, यूरोप और अमेरिका की तुलना में एशिया में हम F&B पर अच्छा मार्जिन बनाते हैं जहां यह विशेषज्ञ परिचालकों को आउटसोर्स किया जाता है। होटल मुख्यतः नाश्ते खुद से तैयार कर लेते हैं जबकि उनके रेस्तरां बड़े पैमाने पर बंद हो रहे हैं।

हमारे लग्जरी सेग्मेंट में, F&B कभी-कभी 50% से अधिक रेवन्यू अर्जित करता है। इसके अलावा, शानदार डाइनिंग स्थलों जैसे कि बेंगलुरू में गेटवे स्थित करावल्ली, दिल्ली के ताज मानसिंह में मिंग हाउस और मुंबई में विवांता बाई ताज प्रेसिडेंट के थाई पैविलियन में हम F&B के नवोन्मेषक रहें हैं। हमें इन ब्रांड्स की पूरी क्षमता का दोहन करना है।

व्यवसाय के रूप में इंडियन होटल्स द्वारा और इसके प्रमुख के रूप में आपके द्वारा सामना की जा रही दीर्घकालीन चुनौतियां कौन सी हैं?

एक मुख्य चुनौती है व्यक्ति आधारित व्यवसाय में जहां ये मार्जिन कम होते जा रहे हैं, एक मुख्य चुनौती है कि मार्जिन कैसे कायम रखा जाए। दूसरा है 100 सालों से ताज की विरासत की रक्षा करना और उसे आगे बढ़ाना।

आपका’दृष्टिकोण ‘एक टाटा’ विचार के बारे में क्या है, जहां कि टाटा कंपनियों के बीच सहयोग को प्राथमिकता दी जा रही है? कैसे इंडियन होटल्स इस विचार को अपने और अपने समूह के लाभ के लिए उपयोग करते हैं?

‘वन टाटा’ अवधारणा का लाभ उठाते हुए, हम कई सारी चीजें एक साथ कर सकते हैं। चुनिंदा ताज होटलों में लग्जरी लाइफस्टाइल स्टोर्स का चेन ‘ताज खजाना’के साथ हम अपने प्रसिद्ध प्रापर्टीज में टाइटन, तनिष्क और अन्य टाटा ब्रांड पेश कर सकते हैं। समूह की कंपनियों द्वारा समूह के व्यापक हित में ज्ञान, संसाधन और तकनीकी इनपुट साझा किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, अपनी प्रॉपटीज में डिजिटलाइजेशन और इनोवेशन लाने में हम किसी बाहरी कंपनी की बजाए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की सेवा ले सकते हैं। ऐसा नहीं है कि हमने विभिन्न टाटा कंपनियों के साथ काम नहीं किया है बल्कि अब तो यह और भी अधिक उत्साह के साथ किया जाता है और इसे नई ऊंचाई तक ले जाया जा रहा है।’’

इस साल हम टाटा समूह की 150वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। यदि प्रत्येक टाटा कंपनी एक आइडिया सामन लाए और यदि इनमें से हर तीसरा आइडिया सफलतापूर्वक क्रियान्वित हो तो सहक्रिया और सहयोग के जरिए हमारे पास 30-50 आइडिया होंगे जो कि इस खास वर्ष में टाटा समूह के लिए एक बड़ा अवसर होगा।

इस इंडस्ट्री में इतने सालों तक रहते हुए आपने आतिथ्य व्यवसाय के बारे में आपने कौन से महत्वपूर्ण पाठ सीखे?

मेरे विचार से तो केवल तीन चीजें: चीजों को सरल रखना, लाभशील होना और प्रासंगिकता कायम रखना।