दिसम्बर 2016 | हरीश भट्ट

इस सदी में युवा होने वालों से मिलें

टाटा ब्रांड के कस्टोडियन हरीश भट्ट कहते हैं कि 2000 के आसपास वयस्क हुई पीढ़ी को समझना बाजार में काम करने वालों के लिए एक चुनौती है।

वो 21 वर्ष की है और इस समय वह कॉलेज में अपनी स्नातक की पढ़ाई कर रही है। वह अपनी निजी राय को बहुत महत्व देती है और अपने से भिन्न विचार रखने वाले, अपने माता-पिता सहित दूसरों लोगों के साथ तर्क करने के लिए हमेशा तैयार रहती है। संभवतः नए कपड़ों के अलावा वह नए उत्पादों को लेकर बहुत उत्सुक नहीं रहती है। लेकिन वह अपने मित्रों के साथ मस्ती करने के लिए हमेशा तैयार रहती है फिर वो चाहे मूवी हो या नाटक और उसके बाद डिनर या फिर ऋषिकेश के पास पहाड़ों पर ट्रेकिंग हो।

नाश्ते वगैरह में उसकी पसंद पश्चिम से प्रभावित है, उसमें चीज़, चॉकलेट, पिज़्जा और तूना सैंडविच के विभिन्न प्रकार पसंद हैं जिनको उसके माता-पिता ने इस उम्र में कभी नहीं देखा था। फिर भी मुख्य भोजन के रूप में घर के बने पारंपरिक दाल, चावल व फिश करी उसको आज भी पसंद हैं। उसे डिजिटल के बारे सब कुछ पता है और वह अपने स्मार्टफोन पर लगातार लगी रहती है, फिर भी लगातार कुछ दिनों के लिए अपने मोबाइल से दूर भी रह सकती है। वह हर चीज पर ऑनलाइन शोध करती रहती है, जिसमें खरीदना और खाना शामिल हैं।

वह ठेठ मिलेनियल है। यह शब्दावली 1980 व 1990 के दशक में पैदा हुए उन युवा लोगों के लिए उपयोग किया जाता है जो आज आम तौर पर 16 से 35 बरस की उम्र में हैं। वे भविष्य के उपभोक्ता है; विशेष रूप से भारत व चीन जैसी तेजी से पनप रही आर्थव्यवस्थाओं का हिस्सा हैं, इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। अकेले भारत में 440 मिलियन मिलेनियल हैं जो कि यूएसए, पश्चिमी यूरोप और जापान की कुल कार्यशील जनसंख्या से बड़ा समूह है। चीन में 415 मिलेनियल हैं जो कि एक ऐसे समृद्ध भविष्य में दाखिल होने के लिए पल-बढ़ रहे हैं जिसके बारे में उनके माता-पिता ने कभी सोचा भी नहीं था।

इनमें से अनेक मिलेनियल ने काम करना शुरु कर दिया है और दूसरे जल्दी ही कार्यबल में शामिल हो जाएंगे। इनमें से अधिकांश माता-पिता बन गए हैं और दूसरे सक्रिय रूप से अपने संभावित जीवन-साथी के साथ डेटिंग कर रहे हैं। इनमें से प्रत्येक घटनाएं, अपने लिए, अपने पार्टनरों व बच्चों के लिए अपनी पसंद के उत्पादों और सेवाओं के लिए नई मांग पैदा करेंगी। और उनकी पसंद अपने माता-पिता की पीढ़ी से काफी भिन्न हो सकती है।

इसलिए, बाजार में काम करने वाले सभी लोगों के लिए आज सबसे बड़ा सवाल है कि: क्या हमें वाकई पता है कि मिलेनियल्स को क्या चाहिए? क्योंकि भविष्य जीतने के लिए कल के उपभोक्ता को जानना बेहद जरूरी है। न केवल बाजार में काम करने वाले सभी लोगों के लिए बल्कि मेरे और मेरी पत्नी जैसे माता-पिता के लिए भी मिलेनियल्स को समझना एक चुनौती है, जब हमारी मिलेनियल बेटी की जीवन व कैरियर के लिए विकल्पों को देखकर हमें खुशी और चिंता दोनो ही होती है।

तो मिलेनियल्स को वास्तव में क्या चाहिए और उनके जीवन को चलाने वाली मुख्य चीजें क्या हैं? हाल के समय में भारत में किए गए अनेक सर्वेक्षणों से एकत्र किए गए कुछ मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं।

  • भारतीय मिलेनियल्स का एक बड़ा हिस्सा आत्म-अभिव्यक्ति, वयक्तिक चुनाव और निजी राय के प्रति जुनूनी है। इसलिए इस जुनून के साथ सहायता करने वाले उत्पाद व सेवाएं जीतेंगी। उदाहरण के लिए फेसबुक इन मिलेनियल्स को उनकी निरंकुश राय पेश करने में मदद करती है। अपनी घड़ियों व एससेसरीज़ में स्वतंत्र, अपरंपरागत डिजाइनों के साथ-साथ ‘मूव ऑन’ के मुक्ति ब्रांड संदेश के माध्यम से फास्ट्रैक, इन मिलेनियल्स को उनकी वैयक्तिकता को व्यक्त करने में सहायता करती है।
  • भारत में सभी शहरी मिलेनियल्स में लगभग 90 प्रतिशत अपनी ऑनलाइन खरीदारी के बारे में शोध करते हैं। इससे उनके ब्रांड को मजबूत ऑनलाइन उपस्थिति, निहित उत्पाद जानकारी, उपभोक्ता समीक्षाएं तथा ई-कॉमर्स क्षमता को महत्वपूर्ण बना देता है। यदि कोई ब्रांड ऑनलाइन उपस्थित नहीं है तो यह इन युवाओं के लिए लगभग अदृष्य होगा। इसी कारण से क्रोमा व टाइटन जैसी ऑनलाइन साइट्स व रिटेलरों की समीक्षाएं इन युवा लोगों में इतनी लोकप्रिय हैं।
  • मिलेनियल्स, अपने पहले की पीढ़ी की तुलना में अनुभव, एडवेंचर और मस्ती की खोज में अधिक लगे रहते हैं। उदाहरण के लिए, makemytrip.com जैसे यात्रा पोर्टलों के माध्यम से यात्रा करने वाले लोगों में से 66 प्रतिशत तक लोग 18 से 35 वर्ष की उम्र के हैं। जब मैं युवा लोगों से बात करता हूँ तो मुझे यात्रा, खोज तथा प्रदर्शन खेलों में भागीदारी करने व बाहर खाने जैसी चीजें उस सूची पर ऊपर रहती है जिस पर वे व्यय करना चाहते हैं। इसी कारण से अनेक युवा लोग स्टापबक्स में आने, खाने व पीने या वेस्टसाइड या स्पोर्ट्सज़ोन स्टोरों से कपड़े व खेलों की सामग्री खरीदते हैं।
  • अनेक मिलेनियल्स उन ब्रांडों को खरीदना पसंद करते हैं जिनके साथ कुछ प्रयोजन जुड़ा हो जो समाज और पर्यावरण के लिए कुछ अच्छा करते हैं। हमें याद रखना चाहिए कि उनको इस ग्रह व समाज में अनेक दशकों तक रहना है जिसे उनके माता-पिता या दादी-दादा की पीढ़ी ने सही तरीके से उपयोग नहीं किया है। कोई आश्चर्य नहीं है कि टाटा टी के ‘जागो रे’ अभियान ने युवाओं के बीच अच्छा प्रदर्शन किया है। इसके अलावा अनेक मिलेनियल्स ऐसे संगठनों के साथ काम करना चाहते हैं जो उनके निजी मूल्यों को साझा करते हैं। इसलिए, वे कंपनियां जो सही तरीके से काम करती हैं उनके युवा कर्मचारियों के कंपनी में बने रहने की अधिक संभावनाएं होती हैं।
  • पिछली पीढ़ी की तुलना में मिलेनियल्स सुविधा को बहुत मूल्य देते हैं। बढ़ते अवसरों को प्रस्तुत करने वाली इस दुनिया में करने के लिए उनके पास बहुत रुचिकर चीजें हैं, इसलिए वे कभी भी समय नष्ट नहीं करना चाहते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग या रेस्टोरेंट के लिए ऑनलाइन ऑर्डर करने का युवाओं में क्रेज़ होने का यह एक प्रमुख कारण है और इसी कारण से अमेज़न या हाल में लॉन्च किए गए टाटा क्लिक जैसे से पूर्ण ऑनलाइन रिटेलर खूब युवाओं को आकर्षित करते हैं।

यह तस्वीर अभी भी अपूर्ण है। इसलिए, कुछ पलों के लिए थमें और अपने जीवन में मिलेनियल्स के बारे में विचार करें। ये आपके भाई-बहन, बच्चे या सहकर्मी हो सकते हैं; ये आप खुद भी हो सकते हैं। उनके जीवन को चलाने वाली प्रमुख चीज़ों क्या हैं? उनको क्या खुश करता है और गुस्सा दिलाता है? उनको क्या पसंद है, और उनको क्या बुरी तरह से नापसंद है? क्या पिछली पीढ़ी की तुलना में आप उनके मनोभावों या व्यवहारों में बहुत अंतर देखते हैं? यदि आप किसी रुचिकर रुझान को देखें तो bhatharish@hotmail.com पर मुझे लिखने में संकोच न करें। जब आप मिलेनियल्स को बारे में सोचते हैं तो आप भविष्य के बारे में सोच रहे होते हैं।

यह लेख टाटा रिव्यूके अक्टूबर-दिसंबर 2016 के संस्करण में पहली बार प्रकाशित हुआ था। ईबुक यहां पर पढ़ें