दिसम्बर 2017

फिर सुलगी कैमिस्ट्री

वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ावों के बीच, टाटा केमिकल्स इंडस्ट्रियल केमिकल बिजनस में अपने नेतृत्व को मजबूत बनाने के लिए नए उत्साह के साथ काम कर रहा है।

टाटा केमिकल्स के सोडा ऐश का इस्तेमाल दुनिया के कुछ बड़े साबुन निर्माता, डिटर्जेंट तथा ग्लास निर्माता कंपनियों द्वारा किया जाता है

ऐसा प्रतीत होता है कि इंडस्ट्रियल केमिकल्स बिजनस का आम लोगों के साथ कुछ लेना-देना नहीं है, पर वास्तव में ऐसा है नहीं। उदाहरण के लिए, दुनिया की सोडा ऐश निर्माण वाली तीसरी सबसे बड़ी कंपनी टाटा केमिकल्स का दुनिया के कुछ सबसे बड़े साबुन, डिटरजेंट तथा ग्लास निर्माताओं द्वारा आगत कंपनी के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस बात की प्रबल संभावना है कि आप और मैं हर रोज थोड़ा-बहुत टाटा केमिकल्स को अवश्य स्पर्श करते होंगे।

टाटा केमिकल्स अपने वैश्विक क्लाइंट्स की जरूरत को पूरा करने के लिए लगभग 4 मिलियन टन सोडा ऐश का निर्माण करता है, जो भारत, अमेरिका, यूके तथा केन्या के अपने संयंत्रों से पूरा किया जाता है। यह हैरानी की बात नहीं है कि इस कंपनी’ के सोडा ऐश के कई सारे उत्पादों को केन्या से भारत, या इसके उत्तर अमेरिकी कारखाने से यूके को भेजा जाता है। “हमारा एक वैश्विक क्लाइंट बेस है और वे सुसमेकित हैं। टाटा केमिकल्स के ग्लोबल केमिकल्स बिजनस के प्रेसिडेंट श्री जरीर एन लैंग्राना कहते हैं, "बाजार के अंतरालों को भरने के लिए ” हम उत्पादों को समूचे भूभागों में भेजते हैं।"

यह सारगर्भित वाक्य कंपनी के ग्राहक-केंद्रित रणनीति को पेश करता है, जिसने इसे एक मार्केट-लीडिंग प्लेयर के रूप में इसे प्रोत्साहित करने तथा इसकी स्थिति को बनाए रखने में मदद की। भले ही सोडा ऐश हमारा मुख्य व्यवसाय हो, पर टाटा केमिकल्स सोडियम बाइकार्बोनेट तथा सहायक उत्पादों का भी निर्माण करता है, जैसे कि कास्टिक सोडा, सीमेंट तथा इंडस्ट्रियल सॉल्ट - जो साथ मिलकर टेक्सटाइल्स, फूड, फीड, माइनिंग, फार्मास्युटिकल्स, पर्यावरण नियंत्रण तथा केमिकल प्रॉसेसिंग जैसे विविध उद्योगों को अपनी सेवा प्रदान करते हैं।

टाटा केमिकल्स कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स तथा कृषि श्रेणियों में भी मौजूद है, पर इंडस्ट्रियल केमिकल्स बिजनस इस कंपनी का मुख्य रोजगार है और यह 1939 से चला आ रहा है, जब पहली बार इसने भारत के गुजरात स्थित मीठापुर में एक छोटे मरीन केमिकल्स प्लांट की स्थापना की थी।

भारत में नेतृत्व
इंडिया ऑपरेशंस के सीओओ, श्री संजीव लाल के अनुसार, टाटा केमिकल्स ने वर्षों से भारत में सोडा ऐश में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखी है। यह रैंकिग पिछले वर्ष थोड़ा नीचे खिसकी, जब कंपनी के कुछ प्रतियोगियों ने परिचालन अवरोधों को हटाकर अपनी क्षमताओं में इजाफा किया। टाटा केमिकल्स अब मीठापुर में कई सारे उत्पादों की सकल उत्पादन की मौजूदा ~2.5 मिलियन टन की क्षमता को ~3.5 मिलियन टन की क्षमता तक लाने के लिए निवेश में इजाफा कर रहा है।

टाटा केमिकल्स का मीठापुर प्लांट अपनी धारणीयता प्रयासों के एक हिस्से के रूप में जल तथा कचरा के संरक्षण पर अपना ध्यान केंद्रित करता है

“हमारी क्षमता का संवर्धन वर्तमान में पर्यावरण क्लीयरेंस प्रक्रिया में हो रहा है और यह 28 बिलियन का निवेश हासिल कर रहा है। हम अपने सोडा ऐश उत्पादन को एक मिलियन टन से 0.8 मिलियन टन तक ले जाएंगे। टाटा सॉल्ट’ की क्षमता में 0.9 मिलियन टन से 1.45 मिलियन टन का विस्तार किया जा रहा है। श्री लाल कहते हैं, “उसी प्रकार, सीमेंट की क्षमता भी बढ़कर 0.9 मिलियन टन ” किया जा रहा है।”

“पारंपरिक रूप से टाटा केमिकल्स का भारतीय बाजार में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रही है और हमारे नए निवेश इसी लीडरशिप पोजिशन को मजबूत बनाएंगे। श्री लाल कहते हैं, ”"चार देशों में हमारे उत्पादन संयंत्रों की मौजूदगी के साथ, हम भारत में ग्राहक की आवश्यकताओं को पूरा करने और हमारे अमेरिका तथा केन्या के संयंत्रों से आने वाले आयातों के साथ घरेलू उत्पादन के माध्यम से बाजार में हमारे पोजिशन को बनाए रखने में अच्छी तरह से सक्षम हैं।"

केमिकल बिजनस को इसके वैश्विक फुटप्रिंट तथा मजबूत कस्टमर कनेक्ट से प्रोत्साहन मिलता है। सोडा ऐश की व्यापक मांग है, जो जीडीपी विकास से जुड़ी है और अन्य कमोडिटीज की तुलना में अस्थिरता के प्रति कम संवेदनशील है। यह लगभग 2-3% की मध्यम और स्थिर औसत वार्षिक विकास दर प्रदर्शित करती रही है। भारत, दक्षिण पूर्व एशिया, लेटिन अमेरिका तथा मध्य पूर्व जैसे विकासशील बाजारों से अधिक मांग पैदा होती है, जो 7-8% के स्तर को छू रहा है, पर ये पश्चिमी बाजारों की कमजोर खिंचाव से अप्रभावी हो जाता है।

यहीं इस बिजनस की वैश्विक प्रकृति मांग को स्थिर करने में मदद करती है। “श्री लैंग्राना कहते हैं,”"सोडा ऐश का बाजार आज काफी संतुलित है और हम भविष्य में भी इसे ऐसा ही देखते हैं।" इसकी यही व्यापक वैश्विक मौजूदगी है, जो ग्राहकों को सप्लाइज में विश्वसनीयता का भरोसा जगाती है। “वे कहते हैं,” "कुछ भूभाग में सप्लाइ चेन की रुकावट की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में, हम बैक-अप सप्लाइज प्रदान करते हैं और यह हमारे ग्राहकों को राहत देता है।"

श्री लैंग्राना एक अन्य केमिकल सोडियम बाइकार्बोनेट की संभावना के बारे में आशांवित हैं, जहाँ टाटा केमिकल्स ग्लोबल लीडरशिप पोजिशन पर है, जो दुनिया का पाँचवां सबसे बड़ा उत्पादक है। सोडियम बाइकार्बोनेट का उत्पादन इसके मीठापुर तथा यूके स्थिति संयंत्रों में किया जाता है और उसका इस्तेमाल फार्मास्युटिकल, फूड, फीड, डाइज, फ्लू गैस ट्रीटमेंट तथा टेक्सटाइल उद्योगों में किया जाता है। सोडियम बाइकार्बोनेट अब एक आधार प्रदान कर रहा है। “अपने विविधतापूर्ण अनुप्रयोगों के साथ यह रसायन बहु-उपयोगी रसायन है। वे कहते हैं, ”"हम अपनी मौजूदगी को अन्य भूभागों में भी फैलाने की योजना बना रहे हैं, जिनमें अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया तथा उत्तर अमेरिका जैसे भूभाग शामिल हैं।"

भले ही सोडा ऐश तथा सोडियम बाइकार्बोनेट आगे भी अधिक मांग वाले आइटम बने रहेंगे, पर कंपनी के सामने खुद के निरंतर पुनर्विकास की चुनौती है।

भारत में यह कंपनी उदयीमान विशेष रसायनों के क्षेत्र में कदम रख रही है, जैसे कि उच्च डिस्पर्सिबल सिलिका (HDS) इस कंपनी के कई प्रकार के HDS का विकास किया है, जो वाहनों के टायरों को चिकना बना सकते हैं और इस प्रकार वाहन कम इंधन की खपत कर सकेंगे, जिससे यह अधिक पर्यावरण हितैषी बन जाते हैं। दुनिया भर में नए पर्यावरण मानकों के आने के साथ ही HDS की मांग तेजी से बढ़ेगी। श्री लैंग्राना के अनुसार, कंपनी भारत में एक ग्रीनफील्ड HDS प्लांट के विकास की योजना बना रही है।

मुख्य केमिकल बिजनस के लिए, यह कंपनी ऐसी तकनीकियों को देख रही है जो परिचालन में बदलाव लाएंगी। श्री लैंग्राना आगे समझाते हैं, “"दीर्घकालिक रूप से, डिजिटाइजेशन तथा ऑटोमेशन हमारे निर्माण के तरीके, हमारी गति तथा बाजार को बदल देंगे; यह उत्पादकता, लागतों, धारणीयता तथा ग्राहकों व सप्लाइ चेन पार्टनर के साथ हमारे व्यवहार के तरीके को प्रभावित करेगा।"” मुख्य कार्यों के ऊपर डिजिटाइजेशन का बड़ा असर रहेगा। श्री लैंग्राना कहते हैं कि कंपनी ने ऐरिबा प्लैटफॉर्म के आधार पर अधिप्राक्ति कार्यों के लिए एक सर्वोत्तम श्रेणी का समाधान आरंभ किया है। “इसने साइकल टाइम कमी तथा दक्षताओं पर काफी सुधार किया है। इसके अलावा, इसने कीमत की खोज को आसान, अधिक व्यापक तथा प्रतियोगी बनाया है और हमारे क्षेत्रों में समेकता लाने के लिए एक अन्य माध्यम के रूप में काम करेगा।”

ग्राहकों के लिए, टाटा केमिकल्स ने भारत में एक अत्याधुनिक CRM का आरंभ किया है और इसे अन्य भूभागों के ग्राहकों तक पहुँचाने की योजना बनाई है। “हमारे ग्राहकों के पास अब ऑर्डर देने, उनकी स्थिति देखने, लॉगिंग फीडबैक, भुगतान करना तथा अपने मोबाइल से अपने अकाउंट की जाँच करने की सुविधा मौजूद है। श्री लैंग्राना कहते हैं, ”"यह हमारे सभी ग्राहकों पर अल्प समय के आधार पर 360o की दृष्टि भी प्रदान करता है।"

टाटा केमिकल्स ’की भविष्यगामी गौरव गाथा कंपनी ’के चार महाद्वीपों में स्थित निर्माण फुटप्रिंट के जरिए निर्मित की जा रही है।

अमेरिका में अनुकूल बयार
अमेरिका में टाटा केमिकल्स, टाटा केमिकल्स नॉर्थ अमेरिका (TCNA) के रूप में मौजूद है। TCNA वर्ष 1884 से ग्रीन रिवर, व्योमिंग में सोडा ऐश का उत्पादन कर रहा है, जो नॉथ अमेरिका का एक बड़ा सोडा ऐश उत्पादन संयंत्र है, जहाँ भूमिगत ट्रोना माइन 55 वर्ग माइल के क्षेत्रफल में फैला हुआ है।

टाटा केमिकल्स का ग्रीन रिवर, व्योमिंग में निर्माण परिचालन में प्राकृतिक अयस्क की उपलब्धता है, जो उत्पादन की लागत में कमी लाती है

ट्रोना एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला खनिज अयस्क है, जिसमें सोडा ऐश तथा सोडा बाइकार्बोनेट का मिश्रण मौजूद रहता है। “TCNA के मैनेजिंग डाइरेक्टर मार्टिन कीहले ने कहा, "इससे हमें काफी लाभ मिला क्योंकि इसने हमें कम लागत वाले बेस ”में परिचालन करने में मदद की।" TCNA हर वर्ष लगभग 4.5 मिलियन टन ट्रोना का खनन करता है, जिसे यह अपने सर्फेस रिफाइनिंग प्लांट में सोडा ऐश में प्रॉसेस करता है।

TCNA के लिए, ट्रोना रिजर्व की उपलब्धता एक बड़ा कारक है, क्योंकि यह उत्पादन की कम लागत पेश करता है जिससे लाभदेयता में वृद्धि होती है। चुनौतियाँ कहीं और मौजूद हैं। “श्री कीहली ने कहा, ” “बाजारों का विकास करना हमारी चुनौती थी और हमें ऐसा करने में काफी सफलता मिली।" “हमारे सोडा ऐश का लगभग 50% अब अमेरिका और कनाडा में बेचा जाता है।”

अन्य चुनौती तकनीकी से जुड़ी है। ग्रीन रिवर संयंत्र अगले साल अपने परिचालन का 50 वर्ष पूरा करेगा। “संयंत्र का आधुनिकीकरण तथा नवीनीकृत करना चुनौती थी। विश्वसनीयता, तकनीकी तथा उत्पादकता में सुधार लाने में हमें काफी प्रयास करना है। श्री कीहले बताते हैं, ”"इंजीनियरिंग तथा तकनीकी से जुड़ी और साथ ही कुशल कर्मचारियों की कमी की चुनौतियाँ भी मौजूद हैं।"

TCNA ने पिछले वर्ष $476 मिलियन राजस्व की उगाही की थी। इसने अपने ग्रीन रिवर प्लांट में नाइट्रस तथा सल्फर ऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने के लिए उल्लेखनीय निवेश किया है। इसने निर्मित कचरों को एकत्र करने तथा उसका फिर से इस्तेमाल करने की प्रक्रिया भी लागू ही है। वास्तव में, कंपनी ने पिछले 50 वर्षों के दौरान पैदा हुए सभी कचरों को रिकवर करने तथा निपटान करने में सफलता पाई है। जल एक अन्य लक्ष्य बिंदु है, और TCNA अब 80% से अधिक जल को रिकवर कर लेता है, जो पहले इवैपोरेशन पॉन्ड्स में नष्ट हो जाता था।

आगे देखते हुए, श्री कीहली ने कहा कि कंपनी आधुनिकीकरण तथा डिजिटाइजेशन को एक बड़े जतन के साथ अंजाम दे रहा है। TCNA अब उत्पादकता को बढ़ाने के लिए नई कंट्रोल सिस्टम के इस्तेमाल की योजना बना रहा है। “वे कहते हैं, ” “हमारी एक बड़ी परियोजना है, जो अगले दो से तीन वर्षों में अत्याधुनिक तकनीकी को अपनाएगी।"

यूरोप में टर्नअराउंड
यूरोप में टाटा केमिकल्स के लिए तस्वीर काफी भिन्न है। टाटा केमिकल्स यूरोप (TCE) सोडा ऐश, सोडियम बाइकार्बोनेट तथा इंडस्ट्रियल सॉल्ट का इस महाद्वीप का एक बड़ा उत्पादक है। इसने वर्ष 2016-17 में £180 मिलियन का राजस्व प्राप्त किया।

यहाँ अधिक चुनौतियाँ मार्जिन तथा निर्माण की प्रभावी लागत से जुड़ी है। TCE के मैनेजिंग डाइरेक्टर, डॉ. मार्टिन ऐश्क्रॉफ्ट ने कहा कि यूके का अपेक्षाकृत अधिक अस्थिर बाजार तथा एमिशन ट्रेडिंग स्कीम के तहत कार्बन प्राइसिंग सोडा ऐश के निर्माण को प्रभावित करता है, जो एक ऊर्जा ख़पत करने वाला उद्योग है। "वे कहते हैं, " “हमारे पास दुनिया का सबसे बड़ा पर्यावरण मानक है, इसलिए हमें ऊर्जा इस्तेमाल की अत्याधुनिक तकनीकी पर निरंतर ध्यान केंद्रित करना होगा।"

टाटा केमिकल्स यूरोप की लागत कम करने की रणनीति रंग लाई है

कंपनी की चुनौती तब ज्यादा बढ़ गई जब उच्च ऊर्जा लागतों के बोझ के कारण नॉर्थविच, यूके के दो सोडा ऐश कारखाने के परिचालन लड़खड़ा गए। "डॉ. ऐश्क्रॉफ्ट ने कहा, ""एक पूर्ण रूप से नई योजना तैयार की गई, जिसमें CHP पॉवर स्टेशन हासिल करना तथा विनिंगटन सोडा ऐश प्लांट का बंद होना शामिल है।"

कंपनी ने यह सुनिश्चित किया कि इसके ग्राहकों को इससे जरा भी प्रभावित न होना पड़े। "अपने ग्राहकों के लिए वैश्विक सप्लाइ लाइंस के प्रबंधन में टाटा केमिकल्स की दक्षता के बारे में बताते हुए डॉ. ऐश्क्रॉफ्ट ने कहा, ""एक नई आयात आधारित 'वर्चुअल फैक्टरी’ की स्थापना की गई ताकि ग्राहकों को अहम 'डुअल सोर्स’ प्रदान किया जाए, जो केवल TCE प्रदान कर सकता है।"

जो पुनर्गठन संपन्न किया गया, उसने नतीजे दिखाना शुरु कर दिया है। “लंबी उथल-पुथल वाली अवधि में अपना ध्यान बनाए रखने का नतीजा मिला है। FY17 का EBITDA £27 मिलियन था— जो FY2015 में £13 मिलियन से आगे बढ़ा जो FY2014 में शून्य था। डॉ. ऐश्क्रॉफ्ट ने कहा, ”"ऊर्जा व्यवसाय (CHP प्लांट) ने पहले वर्ष £10 मिलियन की हानि दिखाई और FY2018 में £8 मिलियन के लाभ की भविष्यवाणी है।” सोडा ऐश दक्षताओं ने भी लाभों में “उल्लेखनीय” योगदान दिया और इंडस्ट्रियल सॉल्ट व्यवसाय एक अक्षम सफलता रही है।

TCE’ का भविष्य तकनीकी के पथ पर जाता है। डिजिटाइजेशन ने एनर्जी बिजनस की उत्पादकता तथा लाभदेयता को बढ़ाने में मदद की है। डॉ. ऐश्क्रॉफ्ट ने कहा कि एनर्जी बिजनस यूनिट ने डिजिटल डेटा विश्लेषण पर एक शानदार काम किया है। “यह न केवल दक्षता की बात है, बल्कि दैनिक आधार पर निर्णय लेने के लिए एक अधिक बेहतर सूचना भी है। वे कहते हैं, ” "FY17 में ही इसने हमारी एनर्जी लागतों में £400,000 की बचत करने में मदद मिली”।

अच्छी खबर है कि ईयू में लंबी अनुपस्थिति के बाद मांग में इजाफा हुआ, हालांकि यूके में विकास आगे भी कमजोर है। “डॉ. ऐश्क्रॉफ्ट कहते हैं, ” "यूके में हमारा लक्ष्य है इंडस्ट्रियल सॉल्ट तथा सोडियम बाइकार्बोनेट के निर्यात में बिक्री हासिल करना।"

मगाडी में पुनर्जीवन
टाटा केमिकल्स के चार महादेश की बुनियाद वाला चौथा स्तंभ टाटा केमिकल्स मगाडी (TCM) केन्या है। TCM लेक मगाडी के समीप विशाल ट्रोना भंडार पर स्थित है। यह अयस्क 300 से अधिक वर्षों तक चलेगा, जिसकी खोज 1902 में की गई थी और 164 sq km के मगाडी कॉम्प्लेक में काम करने वाली TCM एकमात्र कंपनी है।

TCM ने वित्तीय अवरोधों को भी झेला है। वर्ष 2014 में, कंपनी ने एक बड़ा पुनर्गठन देखा, जिसने इसके हाई-वैल्यू प्रीमियम ऐश मैनुफैक्चरिंग प्लांट को स्थगति कर दिया। “TCM के मैनेजिंग डाइरेक्टर जैक म्युचिरा मुई ने कहा, ” "प्लांट के स्थगित होने से राजस्व में 35% से 40% की उल्लेखनीय कमी आई।"

टाटा केमिकल्स मगाडी की टर्नअराउंड रणनीति ने उत्पादकता तथा राजस्व में वृद्धि की है

यह रणनीति अब सकारात्मक प्रभाव दिखा रहा है, क्योंकि कंपनी अंततः अब एक बड़ा टर्नअराउंड देख रही है। “स्टैंडर्ड ऐश मैन्युफैक्चरिंग (SAM) यूनिट तथा सॉल्ट प्लांट (जो इंडस्ट्रियल सॉल्ट का उत्पादन करता है) में उत्पादकता में सुधार हुआ है और राजस्वों में भी लगातार इजाफा हो रहा है। हम नुकसान की ओर से चलकर लाभों की ओर आए हैं। श्री मुई ने कहा, "टीम अधिक दक्ष हो गई है और कंपनी की ’ संस्कृति ” में उल्लेखनीय बदलाव हुआ है।

हालांकि ’ अभी भी बहुत काम करना है। श्री मुई ने संकेत किया कि कंपनी को कुछ हद तक निर्माण प्रक्रिया को पुनर्गठित करना होगा और प्रॉजेक्ट को नया जीवन देने के लिए कुछ कैश भी डालना होगा। “SAM यूनिट के लिए गुणवत्ता सुधार प्रयासों पर ध्यान दे रहे हैं। हमारे पास कई सारे प्रॉजेक्ट नवाचार के तहत हैं, जो उत्पादन की लागत को कम कर सका। हमने पुणे ” स्थिति टीसीएल इनोवेशन सेंटर की मदद को भी चिह्नित किया है।”

ग्राहकों ’ के लिए यह अच्छी खबर है। TCM अफ्रीका का सबसे बड़ा सोडा ऐश उत्पादक है, पर श्री मुई के अनुसार आज यह कंपनी ग्राहकों की अधिक मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं है। दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य पूर्व तथा भारत इस कंपनी के बड़े बाजार हैं। केन्या इस बाजार का 6% तथा अफ्रीका लगभग 12% हिस्सेदारी निर्मित करता है। “वे कहते हैं, ” "हमारे सबसे बड़े खरीददार भारत के ग्लास निर्माता हैं।"

इसके अनुसंगी भूभागों में पुनर्जीवन भारत के मुख्यालयों में आशावाद का एक कारण है। चारों महादेशों में अपार विकास अवसरों को देखते हुए, यह स्वाभाविक ही है कि टाटा केमिकल्स’ के आला अधिकारी भविष्य के संभावनाओं को लेकर आशांवित है। “श्री लैंग्राना कहते हैं, "हम मानते हैं हमारा बिजनस बढ़ेगा, पर यह थोड़ा भिन्न,” हो सकता है।" “जहाँ हम लगातार रूप से वॉल्यूम ग्रोथ पर नजर देख रहे हैं, हम नवाचार तथा धारणीयता के जरिए वैल्यू ग्रोथ पर भी अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।”

अंतिम उपभोक्ता के लिए, इसका केवल यही अर्थ हो सकता है कि उनके रोजमर्रा के जीवन में टाटा केमिकल्स की अधिक मौजूदगी।

धारणीयता अहम है।

गुजरात का मीठापुर टाटा केमिकल्स, केमिकल्स तथा उपभोक्ता उत्पादों के यूनिट का मूल स्थान है। यह सूखा प्रभावित क्षेत्र भी है और पानी की उपलब्धता यहाँ के लिए एक चुनौती है। टाटा केमिकल्स आज ऐसे स्थान पर पहुंच गया है, जहाँ यह अपने निर्माण परिचालनों के लिए नगन्य मीठा पानी का इस्तेमाल कर रहा है। "मीठापुर की हमारी सभी जलापूर्ति समुद्र से पूरी की जाती है- हम उसे रीसाइकिल करते हैं और समुद्री जल का इस्तेमाल करते हैं और जमीन, झील या नदियों से मीठा पानी नहीं खींचते हैं। ग्लोबल केमिकल्स बिजनस के प्रेसिडेंट, जरीर एन लैंग्राना ने कहा, " "हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सभी मीठा पानी स्थानीय समुदायों के लिए सुरक्षित रखे जाएँ।"

सोडा ऐश निर्माण एक अत्यधिक ऊर्जा गहन प्रक्रिया होता है। निरंतर ऊर्जा जाँच तथा ऊर्जा की खपत को कम करने के उपाय प्लांटों की अहम गतिविधियाँ हैं।

सारा फ्लायऐश जो मीठापुर प्लांट से पैदा होता है, यूनिट के अन्य कचरे प्रवाहों के साथ सीमेंट में बदल दिया जाता है, जिसे टाटा शुद्ध ब्रांड के तहत बेचा जाता है। "टाटा शुद्ध एक लाभदायक व्यवसाय है और ऐसा व्यवसाय है जो पूरी तरह से मुख्य सोडा ऐश यूनिट के साथ समेकित है। श्री लैंग्राना कहते हैं, "पर हम खुद को सीमेंट में राष्ट्रीय या राज्य स्तर के प्लेयर के रूप में नहीं देखते हैं; हमारे लिए कचरा के उपयोग" का धारणीय प्रयास जारी रहेगा।"

टाटा केमिकल्स जैव-विविधता कार्यक्रमों तथा अभियानों पर भी अपना ध्यान केंद्रित करता है, ताकि व्हेल शार्क, मैंग्रूव्स तथा कोरल रीफ्स की रक्षा की जा सके। यह प्रत्यक्ष रूप कंपनी द्वारा किया जाता है और साथ ही टाटा केमिकल्स सोसाइटी फॉर रूरल डेवलपमेंट के साथ संयुक्त रूप से संपन्न किया जा रहा है।