जनवरी 2017 | संघमित्रा भौमिक

सुरक्षा एक मानसिक अवस्था है

कर्मचारी उत्तरदायित्व तथा प्रतिमानित सुरक्षा अभ्यासों ने टाटा केमिकल्स को अपने लोगों व पर्यावरण को सुरक्षित रखने में सहायता की है

‘शून्य हानि’ लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम करने का इरादे से टाटा केमिकल्स ने सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण (एसएचई) को 2000 की उच्च प्राथमिकता सूची में रखा। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी के पास व्यापक स्तर के कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व, सुरक्षा व टिकाऊपन (सीएसएस) कमेटी है जो शामिल अनेक चुनौतियों पर फोकस करती है।

नियमों का पालन करना, सुरक्षा मानकों को बेहतर करने में अंतर पैदा कर सकता है

टाटा केमिकल्स की एसएचई नीतियां व प्रक्रियाएं टाटा समूह की नीतियों से संरेखित हैं, जिसमें स्थानीय जरूरतों के साथ उनके दृष्टिकोण को संशोधित करने के लिए विभिन्न कंपनी स्थलों को स्वतंत्रता हासिल है। यहां पर एसएचई मामलों को संभालने में कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन की प्रतिबद्धता उल्लेखनीय है। इन स्थलों को उनके लक्ष्यों को हासिल करने में सक्षम करने के लिए टाटा केमिकल्स को जरूरी समर्थन व दिशा निर्देश सीएसएस कमेटी से हासिल होता है।

“टाटा केमिकल्स में घटनाओं व सुरक्षा प्रदर्शनों की समीक्षा कंपनी के मुख्य कार्यकारी द्वारा की जाती हैं जो इन घटनाओं पर अक्सर हमारे कर्मचारियों से बात करते हैं औऱ इस बात पर चर्चा करते हैं कि इनसे बचने के लिए क्या सर्वश्रेष्ठ उपाय किए जा सकते हैं,” मुख्य सुरक्षा इंजीनियर तथा प्रोजेक्ट ऑफिसर एम रवीन्द्रनाथ बताते हैं।

कार्यान्वयन पर टाटा केमिकल्स में विविध नियंत्रण और संतुलन उपलब्ध हैं। नियमित अंतरालों पर भीतरी व बाहरी ऑडिट की जाती हैं तथा क्रॉस-फंक्शनल व क्रॉस-कंट्री ऑडिट भी की जाती हैं। ये ऑडिट कंपनी को ज्ञान, अनुभव तथा सीखों को साझा करने में सहायता करती हैं।

प्रतिमान स्थापित करने में टाटा केमिकल्स अतिरिक्त प्रयास करती है — कुछ ऐसा ही बनाने के लिए यह टाटा पावर की ठेकेदार सुरक्षा प्रबंधन योजना का अध्ययन कर रही है — तथा इसके एसएचई परिणामों में सतत सुधारों को सुनिश्चित करने के लिए कंपनी विभिन्न प्रकार के दिशानिर्देशों का पालन करती है जिनमें पेशे से संबंधित स्वास्थ्य व सुरक्षा मूल्यांकन श्रेणी, जिम्मेदार देखभाल व ब्रिटिश सुरक्षा काउंसिल शामिल हैं।

दूसरे संगठनों की तरह कंपनी को रासायनिक खतरों व पेशे से संबंधित स्वास्थ्य व सुरक्षा के दोहरे जोखिमों के साथ रहना होता है। इसके साथ टाटा केमिकल्स की परिसंपत्तियों के सदा-परिवर्तनशील गुण भी शामिल हैं, जो कि पुराने पड़ने, वातावरण संबंधी परिस्थितियों — उदाहरण के लिए भारत के गुजरात में मीठापुर में समुद्र से नजदीकी — कच्चे माल की प्रकृति आदि से प्रभावित होते हैं। ये नकेवल संपत्तियों बल्कि उनकी देखभाल में शामिल लोगों की सुरक्षा के लिए चुनौती पेश करते हैं।

इन परिस्थितियों में कर्मचारियों की संलिप्तता, टाटा केमिकल्स के लिए महत्वपूर्ण है। “हम कर्मचारियों को प्रशिक्षित तथा कोच करते हैं, जिसमें मध्य प्रबंधन में शामिल व प्रमुख पदों पर स्थित लोगों के लिए विशेष, उत्तरदायित्व शामिल हैं,” श्री रवीन्द्रनाथ बताते हैं। “हमारे कर्मचारियों को किसी भी प्रकार के असुरक्षित कामों के लिए सशक्तीकरण दिया जाता है और हम सुनिश्चित करते हैं कि प्रबंधन उनका समर्थन करे। लक्ष्य, आपसी सहयोग तथा उत्तरदायित्व की संस्कृति का निर्माण है।”

अनुकूलित समाधान
उत्तरदायित्व की इस भावना को प्रोत्साहित करने और इसके अनेक स्थलों पर उठे मामलों का सामना करने के लिए, टाटा केमिकल्स प्रत्येक स्थल को इसकी अपनी चुनौतियां समझने के लिए प्रेरित करती है, फिर वे चाहे लोगों के संबंध में हों या पर्यावरण, स्थान या उत्सर्जन व अपशिष्ट से संबंधित हों। ऐसे स्थल हैं जो अपने समाधान खुद खोज लेते हैं और कुछ मामलों में उत्तर हासिल करने के लिए क्रॉस-फंक्शनल टीमें साथ काम करती हैं।

समय के साथ मानसिकता और आदतों को बदलने की कठिनाई को देखते हुए कंपनी की सबसे बड़ी चुनौती व्यवहार संबंधी सुरक्षा है। “हम व्यवहार संबंधी परिवर्तन पर प्रशिक्षण देते हैं और हमने इस पर काफी सकारात्मक देखी है,” श्री रवीन्द्रनाथ आगे बताते हैं। “समय के साथ, हमने सुरक्षा के पारंपरिक दृष्टिकोण के अनुसार सुरक्षा प्रबंधकों से जुड़ी सुरक्षा को सामूहिक स्वामित्व वाली सुरक्षा में रूपांतरित होते देखा है, जिसमें वयक्तिक सशक्तीकरण तथा उत्तरदायित्व जुड़ा है।”

जब पर्यावरण की बात होती है तो टाटा केमिकल्स सतत रूप से शामिल जोखिम का मूल्यांकन करती है और इसका सामना करने के लिए जरूरी प्रक्रिया को स्थापित करती है। पर्यावरण संबंधी विचारों पर, सही चरण में ध्यान दिया जाता है। सरकार तथा पर्यावरण दिशानिर्देशों का पालन किया जाता है और कंपनी के पास आपदा प्रबंधन व आकस्मिक योजनाएं तैयार हैं।

सुरक्षा ड्रिल करते कर्मचारियों

ऊर्जा, अपशिष्ट , पानी, ग्रीन कवर आदि पर विभिन्न पैरामीटरों की माप व निगरानी के लिए टाटा केमिकल्स ‘हरित विनिर्माण सूचकांक’ का उपयोग करती है। कार्बन फूटप्रिंट कम करने तथा पानी की खपत कम करने, ऊर्जा उपयोग जैसी चीजों के लिए यह सूचकांक कंपनी द्वारा उपयोग किया जाता है। आकस्मिक योजनाएं इन-बिल्ट हैं और जो खतरनाक क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को आपात स्थितियों का सामना करने के लिए सतत रूप से प्रशिक्षित किया जाता है।

प्रत्येक टाटा केमिकल्स साइट के पास इसके पर्यावरण व लोगों के लिए प्रासंगिक कार्यक्रम उपलब्ध हैं। मीठापुर के पास एक अभिनव सुरक्षा उत्कृष्टता कार्यक्रम — ‘सुरक्षाज्योत या सेफ्टी फ्लेम — है जो भौतिक अवलोकन के माध्यम से सभी गतिविधियों में थकरों व जोखिमों की समीक्षा करता है तथा शमन की योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करता है। सभी 43,000 गतिविधियों का आंकलन क्रॉस-फंक्शनल टीमों द्वारा किया जाता है तथा इसमें पूरा रासायन कॉम्पलेक्श शामिल है। कर्मचारियों के लिए विशेषज्ञता वाला सुरक्षा प्रशिक्षण व्यवहारिक पहलुओं तथा कार्यस्थल संस्कृति पर फोकस करता है।

प्रतिमान व्यवहार
भारत में उत्तर प्रदेश, बबराला में कंपनी का खाद कॉम्पलेक्स ‘प्रक्रिया सुरक्षा प्रबंधन’ (पीएसएम) तत्वों के कार्यान्वयन पर काम कर रहा है जो कि ड्यूपॉन्ट व अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल इंजीनियरिंग गाइडलाइंस के अनुरूप हैं। बबराला में गैल व अमोनिया के साथ काम करने से जुड़े जोखिम को देखते हुए, पीएसएम पर एक प्रणालीगत दृष्टिकोण जरूरी है। यह, प्रक्रियागत खतरों की पहचान, समझ व नियंत्रण के लिए तथा चोटों व दु्र्घटनाओं की रोकथाम के लिए परिचालन संबंधी अनुशासन व इंजीनियरिंग, प्रबंधन कौशलों के अनुप्रयोग को सुनिश्चित करता है।

हल्दिया (पश्चिम बंगाल, भारत) में ‘श्रेष्ठ’ (टीम भावना तथा जुनून के माध्यम से हल्दिया में उपकरणों व संरचनाओं की विश्वसनीयता हासिल करना) के माध्यम से सुरक्षा व स्वास्थ्य पर सतत सुधार हासिल किया जाता है। यह पहल पुरानी पड़ रही परिसंपत्तियों तथा उपकरणों के मामलों को संबोधित करती है तथा सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करती है। मजबूत नियोजन, शेड्यूलिंग तथा गुणवत्ता नियंत्रण के माध्यम से और लाइन फंक्शनों के बीच संयोजन सुधार द्वारा संस्थागत और प्रणालियों को मजबूत बनाने के सांस्कृतिक रूपांतरण को हासिल करना ही इसका उद्देश्य है।

सुरक्षित व्यवहार के महत्व को प्रबलित करने के लिए, टाटा केमिकल्स यूरोप के पास ‘सेफ्टी एमनेस्टी’ के नाम वाला एक कार्यक्रम है जिसके अंतर्गत कर्मचारी आगे आकर उन जोखिमों को समझा सकते हैं जिनका उन्होने सामना किया और बच निकले। इस प्रकार से पहचानी गयी असुरक्षित स्थितियों व अभ्यासों का विश्लेषण किया जाता है। सेफ्टी एमनेस्टी के परिणामों के आधार पर, एक नयी सुरक्षा संचार रणनीति — टैग्ड ‘सुरक्षा एक मानसिक अवस्था है’ — को जारी किया गया था। इसमें वीडियो संदेश, पोस्टर तथा ईमेल अभियान शामिल थे।

परिसंपत्ति सुरक्षा
अपनी संपत्तियों की प्रामाणिकता व विश्वसनीयता को बेहतर करने के लिए टाटा केमिकल्स नॉर्थ अमरीका (टीसीएनए) ने रैम्पअप (परिसंपत्ति प्रबंधन और उत्पादन ओईई के माध्यम से विश्वसनीयता) जारी किया है। सुरक्षा सुधारों को सुनिश्चित करने के लिए टीसीएनए में ‘आसपास टहल कर प्रबंधन’ नाम की एक पहल को आयोजित किया जाता है। ऐसे दूसरे कार्यक्रम भी है जिनमें ‘समस्या की खोज’ शामिल है जो संभावित खतरे की पहचान करता है।

टाटा केमिकल्स के केन्या स्थित मगाडी परिचालन केपास अपने सुरक्षा सुधार कार्यक्रम हैं। इस भौगोलिक स्थल पर चार सुरक्षा उप समितियां है जिनका नेतृत्व वरिष्ठ लीडरों के हाथ में है और वे सीखने व साझा करने, कार्यों में जोखिम विश्लेषण तथा सुरक्षा प्रोटोकॉल व प्रक्रियाओं में कार्यबल प्रबंधन की संलिप्तता पर जोर देते हैं। अपने स्थलों में लोगों व दुनिया की सुरक्षा के प्रति यह टाटा केमिकल्स की प्रतिबद्धता का एक हिस्सा है।