दिसम्बर 20, 2016

टाटा सन्स की ओर से जारी बयान

मुंबई: आज दोपहर टाटा संस लिमिटेड को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के समक्ष कंपनी अधिनियम के अनुच्छेद 241 व 242 के अंतर्गत नोटिस दिया गया। हम समझते हैं कि यह वाद श्री सायरस मिस्त्री के निवेश वाली कंपनियों द्वारा दायर किया गया है। टाटा संस अपने वकीलों के साथ सलाह कर रही है और इस वाद में शामिल आरोपों का प्रत्युत्तर दिया जाएगा।

टाटा संस पुनः दोहराती है कि इसने अपने परिचालनों में कारपोरेट गर्वनेन्स के उच्चतम मानकों का पालन किया है और इस वाद को श्री मिस्त्री द्वारा टाटा समूह व जमशेदजी टाटा के लोकाचार को पूरी तरह से नकारने से उपजी स्थिति का दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम मानती है। श्री मिस्त्री के निजी मामला न होने के हालिया दावे के बावजूद, यह स्पष्ट है कि यह हमेशा से उनके लिए एक निजी मामला रहा है जो श्री रतन एन टाटा के प्रति उनके गहरे विद्वेश को दर्शाता है।

श्री मिस्त्री, टाटा संस के 4 बरसों तक चेयरमैन रहे और यह आश्चर्यजनक है कि वे अपने निदेशक (2006 तक) और चेयरमैन (2012 से) के काल में उनको संबोधित करने में कुछ न करने के बाद अब टाटा संस की गतिविधियों पर आरोप लगा रहे हैं। श्री मिस्त्री को टाटा संस लि. के निदेशक के रूप में हटाए जाने को निदेशकों के प्रचंड बहुमत द्वारा अनुमोदित किया गया है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि श्री मिस्त्री ने उस बोर्ड के इस निर्णय को अनुग्रह के साथ स्वीकार नहीं किया है।